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मंगलवार, 16 अगस्त 2011

आज के ज़माना के पढ़ई....हो जाथे करलई. आवौ पहाड़ के सुन्दरता ला निहारत जाई

पंद्रही ले जादा होगे  (पंद्रह-20 दिन पहले) बेटा  ला हिमाचल प्रदेश, जउन ला देव भूमि घलो कथें, के मंडी आई आई टी मा छोड़ के आये हन. माई पिल्ला त नई गे रेहेन. दाई दादा अउ बेटा भर गे रेहेन. नोनी(जउन  दन्त चिकित्सा संकाय के तीसरा साल मा पढ़त हे) के परीक्षा रिहिस. नई जाय पाइस बिचारी. पूरा संसार उबलत हे जी गरमी मा. हिम के आँचल ले बरफ पिघले लगे हे. हमन सोचन बने जाड़ परही कहिके. कहाँ के जाड़. उहाँ होटल म पंखा चलाये बर परे. कुछु होय पहाड़ी इलाका के कुदरती खूबसूरती के का कहना...हमू अपन केमरा मा कैद करके दू चार ठन फोटू ले आय हन....निहारौ आपो मन ....






आई आई टी मंडी

आई आई टी मंडी



व्यास नदी 
व्यास नदी 
व्यास नदी 
 बेटा सुरम्य 

व्यास नदी 
 अपन संगवारी मन संग 

 माँ  बेटा  
जय जोहार......

सोमवार, 15 अगस्त 2011

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं


स्वतंत्रता दिवस  
की  
हार्दिक शुभकामनाएं 
स्वतन्त्र भारत का स्वच्छंद नागरिक
देखता है; दिखाता है,  दुनिया को अद्भुत नज़ारे 
लहरावे परचम एवरेस्ट शिखर पर 
लक्ष्य सर्वोपरि हो देश की रक्षा 
उतरे समर में रख पाहन जिगर पर
भय भूख भ्रष्टाचार की व्याधि से कौन उबारे 
   व्याधि मिटाने की घुट्टी लिए संग,
चल पड़े हैं माननीय वैद्य अन्ना हजारे 
उम्र के आठवें दशक को कर दर किनारे 
राष्ट्र के भावी निर्माता(आज की युवा पीढ़ी)
 माँ भारती तुमको पुकारे 
सत्य व ईमान की राह पे चल वतन को अब सँवारे
जय भारत....वन्दे मातरम् .
जय जोहार.

शुक्रवार, 22 जुलाई 2011

सावन के झड़ी

सूर सूर तुलसी शशि, उरगन केशवदास।                                                                                                               अब के कवि खद्योत सम जंह तंह करत प्रकास॥                                                                                           ये  दोहा हमर जैसे अड़हा बर लिखे हे। कभू किताब कापी ल पढ़ेन नही। तोपचंद  बने के कोशिश करे लगेन । जब बने बने सुग्घर साहित्य ल देखे नई रहिबे पढ़े नई रहिबे त कायच कर लेबे। बने हे बुलाग जगत एमा थोर बहुत देखा सीखी लिखा जाथे, ओहू टेम मिलथे तब . ए दारी सावन मा बने झड़ी लगे हे। सावन के झड़ी का लगे हे एती पेट गड़बड़ा गे, उहां झड़ी लग गे। घेरी बेरी सुभीता खोली के जवई। ले दे के माड़े हे अभी। लईका ल ले के आई आई टी मा सलेक्शन होगे हे उंहा  भरती करवाये बर जाना हे।              ए मौसम हा डाक्टर मन बर तिहार बरोबर रथे। जहां देख उंहा लाईन लगे हे । कोनो ल सर्दी खांसी कोनो के पेट खराब। इही खातिर कथें खाये पिये बर सावधानी रखो ए सीजन मा। मन मा आईस ये बिचार हा त लिख पारेंव। अब सोचत हौं एखर हेडिंग का दंव। भले मिक्चर बन गे हे लिखई हा, तभो ले हेडिंग जम जहि तईसे लगथे………                                                                                                                                 जय जोहार्………………

सोमवार, 18 जुलाई 2011

क्या जाता हमारे बाप का

लौह पथ गामिनी कहलाती रेल 
जन "काल का" ग्रास बना ले गई 
हावड़ा दिल्ली "कालका" मेल 
हे ईश्वर ! है तेरा यह कैसा खेल ?
कुसूर मुसाफिर का क्या था 
भोंक दिया इन पर खंजर 
खड़े हो गए रोंगटे सबके 
देख भयावह यह मंजर 
(२)
दफ़न ना हो पायी थी लाशें,  हुए मुंबई में बम के धमाके 
कहीं खेद प्रकट, कोई आरोप जड़त,  सब अपनी अपनी हांके 
छीना सुहाग, बुझ गया चिराग, हट गया साया माँ बाप का 
मकसद हमारा "आतंक" है; मरे कोई जिए कोई 
क्या जाता हमारे बाप का 
(आतंकवादियों को जरा भी अफ़सोस नहीं होता कि मारे जाने वाले उन्ही के सगे सम्बन्धियों में से हो सकते हैं. उन्हें तो केवल पैदा करनी होती है  सबके  के दिलों में दहशत .....शायद यह "शंकर" का संहारक रूप हो ......आयें करें विनती उनसे:-  प्रभु ! "संहारक" रूप त्यागें, जगत का कल्याण करें . 
"हर हर महादेव" "बोल बम" "ॐ नमः शिवाय" 
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्  
जय जोहार ......... 

"ॐ नम: शिवाय"

"ॐ नम: शिवाय"                                                                                                                                                               श्रावण मास के प्रथम सोमवार की आप सभी को बहुत बहुत हार्दिक शुभ कामनायें। प्रभू से विनती है समस्त जगत का कल्याण करें। हममे चेतना जागृत हो सत्कर्म के साथ जीवन यापन की सुख दुख मे प्रत्येक का साथ देने की।                                                                                                                                   "मृत्युंजय महादेव त्राहिमाम शरणागतम"                                                                                        जन्म मृत्यु जरा व्याधि: पीड़ितमकर्मबंधनै:"                                                                                      पुन: आप सभी को श्रावण मास के प्रथम सोमवार की बहुत बहुत शुभकामनायें                                 जय जोहार ………                                                                                                                                                                                                                                                                

रविवार, 3 जुलाई 2011

दुम में कितना है दम

दुम में कितना है दम  
डार्विन ने मानव विकास के बारे में कहा था कि पहले मानव की भी पूँछ होती थी लेकिन लंबे समय तक इस्तेमाल न होने की वजह से वह धीरे-धीरे ग़ायब हो गई. वैज्ञानिक मानते हैं कि रीढ़ के आख़िर में पूँछ का अस्तित्व अब भी बचा हुआ है. वे ऐसा कहते हैं तो प्रमाण के साथ ही कहते होंगे क्योंकि विज्ञान बिना प्रमाण के कुछ नहीं मानता. बात जब रीढ़ की हड्डी की हो तो यह सभी जानते हैं कि रीढ़ की हड्डी की मजबूती  हमारे शरीर के लिए कितना महत्वपूर्ण है. और जब रीढ़ की हड्डी मजबूत हो तो 'दुम' जिसका अस्तित्व रीढ़ की आखिर में होना माना जा रहा है, में  दम तो रहेगा भाई. विवेकशील मानव में दुम का भौतिक रूप में दृश्य अस्तित्व भले न हो चारित्रिक अस्तित्व तो अवश्य है.  मन में उमड़ते घुमड़ते विचारों की श्रृंखला की एक कड़ी आपके समक्ष प्रस्तुत है कुछ इस तरह; 
 (१)
माता सीता की खोज में 
रामदूत हनुमान का हुआ आगमन लंका 
दुम हिलाया नहीं, दुम दबाया नहीं, 
वह दुम ही तो है,  
राख कर दी थी सोने की नगरी 
दुराचार पर सदाचार की 
जीत का बज गया था डंका 
(२)  
कुत्ता 
जानवरों में वफादार
दुम हिलाता मालिक सम्मुख 
पाता है  मालिक का प्यार
भार है घर की रखवाली का 
होवे दुलारा घरवाली का 
सुनके आहट अजनबी की 
कहता है,  हो जा प्यारे  खबरदार!
  करना नही  देहरी  पार
वरना 
दुम   की तरह,  इरादे हैं पक्के   
रह न पाओगे मानव तुम 
कर दूंगा तुम पे  दन्त, नख वार 
(३)
इंसान की दुम हो गयी है गायब 
फिर भी दुम हिलाता फिरता है 
दुम की दम पे टिकता है,
रख ताक इज्जत बिकता है 
हो चुकी होती है देर सम्हलने को 
जब दुनिया की नजरों से गिरता है 
                                 जय जोहार............                                                                                                     

रविवार, 5 जून 2011

"होनहार बीरबान के होत चीकने पात"

"होनहार बीरबान के होत चीकने पात" 

प्रत्येक माँ बाप की दिली तमन्ना होती है की उनकी संतान संस्कारिक कुशाग्र बुद्धि वाला और कुछ कर दिखाने का जज्बा रखने वाला हो. कहते हैं न "पूत कपूत तो का धन संचय. पूत सपूत तो का धन संचय" मेरे अनुसार शायद इसका अर्थ यह होना चाहिए; माँ बाप के लिए संस्कारिक संतान ही सबसे बड़ा धन होता है. कपूत निकला तो संचय किया हुआ धन व्यर्थ चला जाएगा और सपूत निकला तो खुद धन कमा लेगा. बच्चे  की उपलब्धि पर जितनी ख़ुशी उपलब्धि हासिल करने वाले को नहीं होती उतनी माँ बाप को होती है. इसका अनुभव दर-असल हमें आज विशेष रूप से हुआ. हमारा बालक "सुरम्य गुप्ता" वैसे तो बचपन से ही पढ़ाई के प्रति समर्पित रहा है, कोशिश यही रहती थी की शत प्रतिशत अंक अर्जित किया जावे. यदि १-२  नंबर कम मिलते थे तो आँखों से आंसू निकलना शुरू. हमें लगा कहीं यह स्वभाव आगे चलकर अवसाद को न निमंत्रण दे दे. धीरे धीरे उसे समझाते गए,  नर्वसनेस को अपने जीवन में स्थान नहीं देने के लिए.  माध्यमिक शिक्षा ९४% अंक के साथ उत्तीर्ण किया. सी बी एस ई पाठ्यक्रम रहा. गणित उसका प्रिय विषय है. कोचिंग भी लिया और इस वर्ष बारहवीं की परीक्षा ८९% (भौतिक, रसायन व गणित में क्रमशः ९४, ९१, व ९५ प्रतिशत) अंक प्राप्त कर उत्तीर्ण किया.  सबसे अहम् बात रही भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आई आई टी -जे ई ई ) प्रवेश परीक्षा, जिसमे   केवल ९,५०० - १०००० छात्र चुने जाते हैं,  ४,३०५ रेंक के साथ  उत्तीर्ण कर लेना. अभी ए आई इ इ इ का परिणाम आना बाकी है.  इस परीक्षा में लगभग पांच लाख छात्र  भाग लिए  थे.  इसके अलावा बिट्स पिलानी के लिए भी पात्रता हासिल कर लिया है. आज भारतीय स्टेट बैंक, क्षेत्रीय व्यवसाय शाखा  भिलाई द्वारा  आई आई टी में चयनित छात्रों के लिए सम्मान समारोह का आयोजन किया गया था. वैसे भिलाई शहर छत्तीसगढ़ प्रांत का "एजुकेशन हब"  कहलाता है. हर साल इस शहर से ही औसतन ४०-५० छात्र चयनित होते हैं.  करीब पचास चयनित  छात्रों ने हिस्सा लिया.  प्रोत्साहन  राशि स्वरुप प्रत्येक छात्र को १००१ रुपये प्रदान किया गया. हमने भी इस कार्यक्रम में पत्नी श्रीमती सुरेखा  गुप्ता (वे स्वयं भारतीय स्टेट बैंक में कार्यरत हैं), बिटिया सुरभि गुप्ता (दन्त चिकित्सा निकाय में तृतीय वर्ष की छात्रा) व बेटा सुरम्य गुप्ता के साथ हिस्सा लिया. यही वह क्षण था, हम सभी के लिए हार्दिक ख़ुशी का. बिटिया भी माध्यमिक व उच्च्तार माध्यमिक परीक्षा अच्छे अंकों के साथ उत्तीर्ण कीं. वैसे मै उसे ऑलराउंडर कहता हूँ क्योंकि वह उतनी ही रूचि के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों में बढ़ चढ़ कर हिसा लेती है.  टॉप रेंक वाले तो कोटि कोटि बधाई के पात्र हैं ही, अपने बेटे सहित उन सभी विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई देना चाहूँगा जिन्होंने यह परीक्षा उत्तीर्ण की है.  अपने समस्त स्वजनों/ आत्मीयजनो/ मित्रों से उनकी प्रत्यक्ष/प्ररोक्ष दुआओं के लिए भी आभारी रहूँगा साथ ही बच्चे के उज्जवल भविष्य के लिए उनका आशीर्वाद चाहूँगा......
जय जोहार..........