घुरुवा के दिन घलो बहुरथे
ऊपर दिखत हे तउन फ़ोटू माँ दू ठन हा "घुरुवा" के आय अउ एक ठन हा अइसे बस्ती के, जेन ला "घुरुवा" च केहे जा सकथे. हमन देखे होबो अउ अनुभव घलो करे होबो के गाँव मा "घुरुवा" के का महत्त्व रहै. पहिली अतेक आधुनिकता के ज़माना नइ रहिसे. माटी के घर माँ रहन अउ माटी च के खपरा (भट्ठी मा पका के बनाये) के रहै छान्ही. घर माँ खूब गाय भैंसी पालें. घर ला बने गाय अउ भइन्स के गोबर मा लीपें. उही गोबर ले छेना थोपें. अउ छेना(कंडा) के आगी मा चुल्हा माँ भोजन रान्धें. पहिली आज कस कचरा फेंके के पलास्टिक के डब्बा उब्बा(जेन ला आज डस्ट बिन कथें) के उपयोग नइ होवत रहिस. घर ले थोर किन दुरिहा मा कचरा ला फ़ेंक देत रहिन हे. ओमा चाहे गोबर होय चाहे अउ कांही कुछु. कुल मिला के गंदगी रहै. वैसे गोबरे च ला कुढ़ोवें. अउ एखरे ढेर ला कहैं "घुरुवा". गोबर के ये ढेर हा खेती बर अब्बड़ फायदा के चीज रहै. एला कथें गोबर खातू. एखरो किम्मत रखें जी जेखर "घुरुवा" रहै ओ मन. खेती किसानी के दिन मा इन घुरुवन के बहुत डिमांड रहै. इन्खरो दिन हा फिर जाय अउ घुरुवा के मालिक के ओखर लेवैया के घलो. जम्मो बर फायदेमंद रहै. एक बात अउ ये घुरवा के लेवैया ला कचरा के ढेर माँ कांही कीमती चीज मिल गे त झन पूछ. मिले के संभावना बिलकुल रथे च. त ये तो होईस घुरुवा के गोठ.
हमर देश माँ ओइसने एक तबका अइसे हे के झुग्गी झोपड़ी मा कइसनो करके अपन गुजर बसर करत हे. एक लाँघन दू फरहार करके रहत हे. इहों कभू कभू होनहार लइका निकल जाथे जउन हा कंडिल (लालटेन) अउ चिमनी के अंजोर मा, अउ नही त सड़क मा लगे खम्भा के लाईट के अंजोर माँ पढ़ लिख के अतेक बड़े आदमी बन जाथे के ओखर पूरा घर परिवार तर जाथे. अउ दूसर मन तहां ले केहे ल धर लेथें "घुरुवा के दिन बहुरगे" कहिके. मैं अपन एक संगवारी ल देखे हंव. ओखर सियान (ददा) हा ठेला चला के ओला पढ़ाइस. आज ओ हा टेलीफोन विभाग मा बने नौकरी करत हे. अपन परिवार ला चलावत हे. बहुत हुसियार रहै. गणित मा ८०-९० प्रतिशत नंबर लावे. ओखर इंजीनियरिंग कालेज मा घलो होगे रहिसे सिलेक्शन. फेर इही रुपिया पैसा के परबन्ध अउ पहिली कालेज मा रेकिंग के नाव मा होअइया मार पीट के डर माँ बिचारा पढ़ नई पईस. सार चीज जउन केहे चाहत हौं वो आय "कमल हा कीचड़ माँ ही खिलथे. घुरुवा घलो उपयोगी होथे कभू कभू. आप सबो के समझ आवै कहिके अलकरहा भाखा के मायने घलो लिख देथौं:-
लालटेन/लेम्प के अंजोर मा पढ़त
घुरुवा = कचरा/गोबर के ढेर
अनुभव घलो करे होबो = अनुभव किये होंगे.
अतेक = इतना
खपरा = खपरैल
भोजन रान्धें = खाना बनाते थे. (कूकिंग)
खम्भा के लाईट के अंजोर माँ = सड़क में लगे खम्बे के लाईट के उजाले में.
इन्खरो दिन हा फिर जाय = इनकी भी तकदीर चमक जाती थी या इनमे भी बदलाव आ जाता था.
एक लाँघन दू फरहार करके रहत हे = दो जून की रोटी भी नसीब न हो पाना. एक जून खा रहे हैं तो दो दिन उपवास .
एक लाँघन दू फरहार करके रहत हे = दो जून की रोटी भी नसीब न हो पाना. एक जून खा रहे हैं तो दो दिन उपवास .
"घुरुवा के दिन बहुरगे" = कूड़े के ढेर के दिन भी बदल गए याने इनकी भी तकदीर चमक गयी.
वैसे ज्यादा कठिन नही है. समझ में आ ही जावेगी.
जय जोहार........






