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रविवार, 16 मई 2010

दोस्ती ल रिश्ता मा कैसे फिट करे जात रहिस?

ओतेक बड़े त नई हो गे हन. तभो ले अतका कहे के लाइक हो गे हन अपन लइका मन ला  के हमर लैकाई मा ए दइसे दइसे होवत रहिसे. पहिली संगवारी बनावे त एक दूसर बर मर मिटैया संगवारी बनावें.  अपन दोस्ती ल पुख्ता करे बर आनी बानी के तरीका  अपनावें तैसे लागथे. जैसे "मितान" "तुलसीदल" "महापरसाद" "जंवारा" "भोजली" अउ काय काय आय तेखर सुरता नई आवत हे;  नांव देवें.  अउ एक दूसर ला संबोधन बर इही सब नांव के  परयोग  करैं. एला "बदई " कथें. उदाहरण "मितान" बदे हन जी, फलाना बदे हन जी .  बड़ा पवित्र रिश्ता माने जाय जी. अईसन संगवारी के लइका मन अपन दाई ददा के मितान मितानिन  ला फूल दाई फूल ददा के नांव ले संबोधित करैं. अब्बड़ परेम रहै एक दूसर संग. अब अईसन परेम हा नंदावत जात हे. अब सब देखावा होगे हे.  अंतर्मन ले निभाये के बारी आथे त तिरियाये लाग्थें. दुरिहा भाग्थें. काय करबे सब ये जुग के परभाव ताय. ठीक हे रे भाई देश काल परिस्थिति ला ध्यान माँ रखके अपन अपन रद्दा माँ रेंगे ल परथे. वैसे मोर रिश्ते दारी मा भतीजा हवे. ओखर तीन संगवारी अईसे हें  बचपन से  चारों के  घर मा अतेक एक दूसर संग परेम हावै के कोनो पोरोगराम हो  सुख हो चाहे दुख हो, सब्बोझन मिल बाँट के निपटाथे.  अभी अभी दैनिक भास्कर के नगर संस्करण माँ छपे रहिसे ये बारे मा.  ये मन भेलाई के लक्ष्मी नगर माँ एके डिजाईन के मकान बनवाये हें, एके दिन चारों झन गृह प्रवेश कराइन. मिलजुल के पार्टी करिन. अत्केच नई ये. ए मन भिलाई इस्पात संयंत्र म नौकरी करथें शायद एके डिपार्ट्मेन्ट मा।  महू देखत हौं अब्बड दिन ले।  कहूं घूमे बर एल टी सी लेके जाहीं तभो  एक संग. एला कथें दोस्ती. ऊंचा नीचा मा एक दूसर के मदद करे बर तैयार. दोस्ती के मिसाल हे भाई.
जय जोहार.... घुघुवा कस जागत हौं अब जाथौं सुतिहौं.
तारीख: १६/०५/२०१०      

1 टिप्पणी:

'उदय' ने कहा…

...... जय जोहार .... का होगिस गा ... कबो कबार जागे ला पड जाथे ... जय श्री राम !!