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मंगलवार, 18 मई 2010

जाको राखे साइयां मार सके न कोय. बाल न बांका कर सके जो जग बैरी होय (समापन)..

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दूसरे दिन सुबह  उसे होश आ गया था. ऑक्सीजन मॉक्स हट चुका था. वैसे मेरी बिटिया उसके पास जा जा कर उसके साथ में सभी के होने का एहसास दिलाते रहती थी. मैं पुनः देखने गया. उसका पहला प्रश्न था "पापाजी आप कैसे हैं व मम्मी कैसी है?" मुंह से आवाज नहीं निकल पाई पर इशारे से कहा सब ठीक है.  वहां से आकर भर्राई  आवाज में पत्नी व बिटिया को बेटे की हालत ले दे के  बता सका. उनकी आँखों से भी आंसू छलकने लगा. तीसरे दिन बेटे को वार्ड में शिफ्ट किया गया. जिस कक्ष में शिफ्ट किया गया वह कमरा मच्छरों से भरा था.  तुरंत एयरकंडीशंड कमरे में ले जाया गया. चौथे दिन उसके सर में लगे पाइप केथेटर इत्यादि खोल दिए गए और घर ले जाने के लिए डॉक्टर ने अपनी स्वीकृति दे दी. चिकित्सालयीन प्रभार भुगतान हेतु औपचारिकताएं पूरी की जा रही थी कि बेटे को ज्वर ने अपने शिकंजे में कस लिया. मन गवाह नहीं दिया कि उसे इस हालत में घर ले जाया जावे.  ऊंची ऊंची एंटीबायोटिक दवाएं, इंजेक्शन दिया जाने लगा. ज्वर ठीक होने का नाम ही नहीं ले रहा था. डोक्टरों को बताया गया था कि यह ज्वर बेटे को गले में इन्फेक्शन के कारण हो सकता है पर दो दिनों तक डॉक्टरों ने इस बात की ओर ध्यान नहीं दिया. अंततः तीसरे दिन बेटे का  गला चेक कर उचित औषधि देने कहा गया.  ज्वर की तीव्रता पूरी तरह ख़तम नहीं हुई थी पर कम अवश्य होता जा रहा  था. दिनांक 30.05.2006 को उस अस्पताल से बेटे को डिस्चार्ज किया गया  और  हम सभी शाम तक  अपने घर  भिलाई पहुँच गए. 
"प्रति उपकार करौं का तोरा 
सन्मुख होई न सकत मन मोरा" 
गाँव वालों, अजनबी राहगीरों जिन्होंने अपनी गाड़ी में बिठाकर चिकित्सालय तक तत्परता से पहुंचाया, परिवार वालों, विभागवालों सभी का सहयोग अनुकरणीय, अविस्मर्णीय एवं "सुनु सब तुम्हरि उऋण मैं नाही. देखेंव करि विचार मन माही" याने इस उपकार का ऋण न चुका सकने वाला है.    
जय जोहार......  
                                                                             "जय हनुमान जय जय सिया राम" 

3 टिप्‍पणियां:

honesty project democracy ने कहा…

बिलकुल सही बात जीवन और मृत्यु सिर्फ साईं के ही हाथ है /विचारणीय और प्रेरक प्रस्तुती /

SANJEEV RANA ने कहा…

जाको राखे साइयां मार सके न कोय

ललित शर्मा ने कहा…

दुर्घटना अवश्य हुई लेकिन दैवीय कृपा से कुछ बिगाड़ न हो सका। उस परमपिता परमेश्वर के प्रति हम कृतज्ञ हैं जिसने अपना आशीर्वाद बनाए रखा।

बस हम तो यही कहते हैं कि

"डरो वह बड़ा जबरदस्त है"
सब कुछ उसके हाथ में है, जीवन मरण जस-अपजस।

सौंप दिया इस जीवन अब भार तुम्हारे हाथों में
है जीत तुम्हारे हाथों में है हार तुम्हारे हाथों में।

अस्तु