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बुधवार, 9 जून 2010

तवा गरम है सेंक लो रोटी



कहावत है तवा गरम है सेंक लो रोटी.  मतलब समय अनुकूल है, परिस्थितियाँ ऐसी निर्मित हो गई हैं कि आप अपना काम बनवा सकते हैं, अपना उल्लू सीधा कर सकते हैं. रोटी कैसी बनती है, कैसी सिकती है, कैसा स्वाद रहता है यह अन्य बातों यथा आटे के प्रकार, रोटी के आकार आदि के अलावा  निर्भर करता है तवे पर पड़ने वाली आंच कितनी है. तवा गरम किस प्रकार हो रहा है मसलन चूल्हे पर  रखा है, कोयले वाली सिगड़ी पर रखा तवा है, स्टोव पर रखा तवा है, या गैस चूल्हे पर रखा तवा है.  हमारे देश में तो वैसे गैस चूल्हे का प्रचलन ज्यादा हो चला है फिर भी गाँव में, अभी भी मिटटी के चूल्हे का प्रयोग होता है जिसमें  कंडे व लकड़ी जलाकर भोजन आज भी पकाया जाता है. शहरों में भी नीचे तबके के लोगों में इसी चूल्हे या स्टोव, सिगड़ी आदि उपयोग में लाये जाते हैं.  वैसे मैं भी गाँव में रहा हुआ हूँ और मुझे चूल्हे में पकाया हुआ भोजन सबसे स्वादिष्ट लगता था. आज कितने दिन हो गए ऐसा भोजन नसीब हुए पता नहीं.  भाई जैसे भी हो उदर के भीतर  भभक रही  भूख की ज्वाला को शांत करने के लिए जरूरी है रोटी.     

                                                       आज इस कहावत का उपयोग होता है अपनी भड़ास निकालने के लिए अथवा आकस्मिक अप्रत्याशित घटनाओं के लिए सरकार द्वारा तत्काल  उपलब्ध कराई  जा रही आर्थिक सहायता का लाभ लेने के लिए, ( हक़दार न होते हुए भी साबित करके  कि हम हकदार हैं ). हम लिखते लिखते रास्ता भटक जाते हैं. अब तवा गरम करने कि लिए यहाँ इंधन किस किस प्रकार का मिल जाता है यह कहना चाह रहे थे. इस प्रकार का इंधन एक पक्ष  (सत्ता पक्ष) के लिए दुखदायी हो जाता है तो विपक्ष के लिए वास्तव में रोटी सेंकने का बढ़िया साधन. इंधन उपलब्ध कैसे हो जाते हैं, जरा गौर फरमाइयेगा; 
  1. लम्बी अवधि से किसी आयोग द्वारा किये जा रहे जांच की रिपोर्ट आ जाना
  2. किसी घोटाले का उजागर हो जाना 
देश के किसी भी स्थान में आतंकवादी, नक्सलवादी, आदि आदि बड़े हमले हो जाना और जन  हानि होना  कहीं कहीं प्राकृतिक आपदा का आक्रमण हो जाना और उसमे भी जन-हानि हो जाना ..........मुद्दे जो इंधन का काम करे बहुत हैं.....  बस क्या है शुरू हो जाती है लोगों (बड़े बड़े जन प्रतिनिधियों) की बयानबाजी, एक दूसरे पर दोषारोपण.  उन्हें मालूम रहता है की ये सब जो बयानबाजी रुपी रोटियां सेंकी जा रही है वह वक्त आने पर काम आएँगी. और वह वक्त होगा "आम चुनाव".    ...................
जय जोहार.....                                            

10 टिप्‍पणियां:

दिलीप ने कहा…

badhiya baat kahi sir...avsarvaadi log hain...shaheedo ke tabooto pe topon pe, chaare pe jaane kahan kahan rotiyan senk li....jay johar

शिवम् मिश्रा ने कहा…

क्यों ना अब की बार पूरी या पराठे खाए जाए ................इन की रोटी यह ही खाए !

जय जोहार.....

Udan Tashtari ने कहा…

सही कहा...जिसको जैसा मौका लग रहा है रोटी सेंक ले रहा है.

आचार्य जी ने कहा…

आईये सुनें ... अमृत वाणी ।

आचार्य जी

Shekhar Kumawat ने कहा…

प्रस्तुतिकरण के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari ने कहा…

ऐसे समय में रोटी राजनैतिक विचारधारा वाले लोग ही सेंकते हैं भईया. वैसे गरमी इतनी है कि दोपहर को हमारे सिर में रोटियां सेंक लो.

कल जब आपने फोन किया था तब क्राईम ब्रांच वालों के द्वारा लोगों के माथे पर रोटी सेंकते देख रहा था.

पी.सी.गोदियाल ने कहा…

अच्छी बात कही अपने रोटी सकने के मार्फ़त, आज का यही सच है !

'उदय' ने कहा…

...जबरदस्त पोस्ट ... धमाकेदार!!!

mridula pradhan ने कहा…

ekdam thik.

शरद कोकास ने कहा…

रोटी के बिम्ब के कितने ही इस्तेमाल हैं