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मंगलवार, 8 जून 2010

फैसले ने कुरेदा है लोगों का गम

भीषण गैस त्रासदी झेला  सन उन्नीस सौ चौरासी वाला साल
मध्य प्रदेश की राजधानी, शहर है वह भोपाल 
अदालती कार्रवाई में लग गए पचीस साल
इतनी लम्बी अवधि में बिसर गया था लोगों का ख्याल 
न्यालाय होता है सम्माननीय, कुछ न कहेंगे हम
अफ़सोस है इस बात का, फैसले ने कुरेदा है लोगों का गम
प्रकरण चाहे "अफजल" का हो चाहे हो इसमें "कसाब"
पारित करना होगा कानून ऐसा जिसमे थोड़ा हो "कसाव" 
लोगों की प्रतिक्रिया: देखिये दैनिक भास्कर का मुख पृष्ठ 
"15 हजार मौतें, सजा दो साल";
"पुलिस के कड़े बंदोबस्त के बीच हुए इस फैसले पर मानवाधिकार संगठनों तथा गैस पीड़ितों ने असंतोष जताया है. भोपाल ग्रुप ऑफ़ इन्फर्मेशन एंड एक्शन के कार्यकर्ता सतीनाथ षडंगी के मुताबिक, इस फैसले से पीड़ितों को लगता है की दुनिया की साबसे भीषण त्रासदी किसी सड़क दुर्घटना में बदल गयी है" 
जय जोहार.......

6 टिप्‍पणियां:

'उदय' ने कहा…

...नो कमेंटस!!!!

संगीता पुरी ने कहा…

क्‍या कहा जा सकता है ??

Vidhu ने कहा…

सतीनाथ षडंगी के मुताबिक, इस फैसले से पीड़ितों को लगता है की दुनिया की साबसे भीषण त्रासदी किसी सड़क दुर्घटना में बदल गयी है"
सहमत हूँ सही कहा है उन्होंने

शिवम् मिश्रा ने कहा…

न्याय के नाम पर भद्दा मजाक किया गया है !

arvind ने कहा…

न्याय के नाम पर भद्दा मजाक .

honesty project democracy ने कहा…

अब तो भगवान के अवतार की ही प्रतीक्षा है,जो न्याय कर सके......