आईए मन की गति से उमड़त-घुमड़ते विचारों के दांव-पेंचों की इस नई दुनिया मे आपका स्वागत है-कृपया टिप्पणी करना ना भुलें-आपकी टिप्पणी से हमारा उत्साह बढता है

सोमवार, 24 अक्टूबर 2011

दीपोत्सव का पर्व दिवाली रौशन घर घर करे दिया



दीपोत्सव का पर्व दिवाली 
रौशन घर  घर करे दिया 
परब आगमन के पहले ही
प्रभू  तूने कैसा  सिला दिया
जगदलपुर नक्सली कहर
(छत्तीसगढ़ अनेक जवान शहीद )
कहीं मावे में हो  मिला जहर
 (उत्तर प्रदेश शायद बारह बच्चों की मौत )
ढहा सेतु गिरी यात्री गाड़ी, क्या कुपित हुई माँ काली  
 (गुजरात पुल ढहने से २२ की मौत )
बिलासपुर का रेल हादसा बलि कितनो की दे डाली
जारी है तेरी  विनाश-लीला, हुई कंपित माँ धरती  
सहस्त्रों जान गँवा चुके, देश का नाम है तुर्की 
विनती है प्रभु आपसे, लगे अनहोनी पे विराम
दुखियारों को सहन शक्ति दे, पुकारे आम अवाम 
पञ्च दिवसीय दीपोत्सव का हुआ आज प्रारम्भ 
कर भगवान् धन्वन्तरी की पूजा  काज करें आरम्भ
सभी मित्रों को दीपोत्सव के प्रथम दिवस "धनतेरस" एवं भगवान् धन्वन्तरी जयंती के उपलक्ष में हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं 
जय   जोहार .......

गुरुवार, 6 अक्टूबर 2011

विजया दशमी की हार्दिक शुभकामनाएं

विजया दशमी की हार्दिक शुभकामनाएं 
ड्यूटी से घर आते ही 
हम अख़बार पे नज़र दौड़ाये
अटकी नज़र  हेडिंग पर;
"मासूम जिंदगी पर छाये 
दशानन के  साये"
आज के बच्चों  के
दस अवगुण मात- पिता को बताये
न केवल बताये, उन्हें जिम्मेदार ठहराए 
पहला शिष्टाचार न आना 
दूजा अपनी  माँग मनवाना 
तीसरे में अनुशासन हीनता 
चौथे में गायब नैतिकता 
पंचम संस्कारों की सीख न देना 
टूटा परिवार तो फिर न कहना 
षष्टम में अड़ियल रवैया 
करवावे सबको ता ता थैया 
हदों  का उल्लंघन है  सप्तम 
  उपकरणों पर निर्भरता  अष्टम  
(केलकुलेटर, मोबाइल, कंप्यूटर, टी वी,
वीडियो गेम पर आश्रित आदि पर  होने देना )
 नवमं  स्वच्छंद आचरण 
दशमं पक्षपात का बीज अंकुरण 
इन पे गौर फरमायें, बच्चों को समझाएं, 
अंकुश इन पे लगाएं
उनका भविष्य उज्जवल बनाएं 
 पुनः आप सभी मित्रों को विजया दशमी की शुभकामनाओं सहित 
जय जोहार.....

गुरुवार, 29 सितंबर 2011

जिव्हा का हुकम है मानना चाहे बिगड़े पाचन तंत्र ॥

वात, पित्त, कफ संतुलन जब जब बिगड़ा जाय। 
तरह तरह की व्याधि देह में खूब उत्पात मचाय॥

कानून का पालन कौन करे, हैं हम आज स्वतन्त्र ।
जिव्हा का हुकम है मानना चाहे बिगड़े पाचन तंत्र ॥ 

धन दौलत की चाह संग संग मार गई मंहगाई।
भाग- दौड़ आपा-धापी  में काया की सुध है गंवाई॥

रोग ग्रसित जब होत हैं, चंहूँ  ओर  नजर दौड़ाय।
वैद्य, चिकित्सक, डॉक्टर, कौन है मर्ज भगाय॥

नाड़ी देख तकलीफ़ जो रोगी को दियो बताय।
 जानत यह तरकीब जो,  नाड़ी वैद्य कहलाय॥

औषधि से बढ़कर पथ्य अरु परहेज आवे है काम।
दवा खायें वैद्य-सलाह ले, मिले जल्द से जल्द आराम॥ 

वैद्यकीय पढ़ाई सहज नही, श्रम  "काल" "अर्थ" खर्च होय।
इम्तिहान सरोवर जो पार करे, ओपे फ़ख्र करे हर कोय॥

 विग्यान तरक्की कर रहा, होय नित नव अनुसंधान।
कोई रोग असाध्य नही,  लें जन मानस  यह जान ॥

वर्तमान चिकित्सा पद्धति,  करें जेबें सबकी खाली।
मुर्दे से भी पैसा वसूले, "सेवा- भाव" की बलि दे डाली॥

अंतिम पंक्ति इसलिये लिखी गई है कि आज प्रत्येक व्यक्ति द्रुत गति से धन संचय के फ़िराक मे लगा रहता है। यह सही है कि आज की चिकित्सकीय पढ़ाई बहुत ही खर्चीली है। यह भी एक वजह हो सकती है "सेवा भाव" धीरे धीरे खतम होने की। मां बाप ने कर्ज लेकर पढ़ाया हो, उसे छूटना है अथवा अनंत अभिलाषाओं की/चाहतों की  पूर्ति करनी  है,  पता नही। एक नर्सिंग होम मे मुर्दे को जबरन वेंटिलेशन मे रख उसके रिश्तेदार से दो दिन का "चार्ज" वसूलना किसी ने बताया था या पढ़ा था पेपर मे;  याद नही आ रहा है किंतु इसी परिपेक्ष्य मे अंतिम दोहा लिख बैठा। वैसे भी आजकल रोग  के लक्षण के आधार पर चिकित्सा कम ही देखने को मिलती है। लक्षण तो रोगी का  देखा जाता है। स्टेटस के मामले में। तमाम पेथालॉजिकल टेस्ट कराने की सलाह पहले दी जाती है। वैसे हम भी,  चाहें मरीज हों या मरीज के परिजन, जो आजकल ज्यादा ही डेढ़ होशियार हो गये हैं, इसके लिये जिम्मेदार हैं। फ़लां डॉक्टर बेकार है, सिंपल एम बी बी एस तो है, भाई हम तो अब डी0एम0 की डिग्री वाले के पास ही जायेंगे। इस साइकोलॉजी का सभी फ़ायदा उठाना चाहेंगे।  क्षमा चाहूँगा हरेक के लिए यह बात लागू नहीं होती. हो सकता है देश काल परिस्थिति के हिसाब से इस प्रकार का वातावरण बन गया हो।
जय जोहार…।

बुधवार, 28 सितंबर 2011

नवरात्रि की हार्दिक बधाई

"ॐ गं गणपतये नम:"
"ॐ श्री दुर्गायै नम"
या देवी सर्वभूतेषु शान्ति रूपेण संस्थिता, 
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः 
प्रथमम शैलपुत्री च द्वितियम ब्रह्मचारिणी।
त्रितियम चंद्र्घण्टेति कूष्मांडेति चर्तुथक॥
पंचमं स्कन्दमातेति शष्ठमम  कात्यायनीति च।
सप्तमम कालरात्रीति महागौरीतिचाष्टमम॥
नवमं सिद्धिदात्रीच नवदुर्गा प्रकीर्तिता।
उक्तान्येतानि   नामानि ब्रह्मणैव  महात्मना॥
"माँ भगवती जगत   का कल्याण करे" 
सभी मित्रों को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं 
जय जोहार.....

बुधवार, 31 अगस्त 2011

ॐ श्री गणेशाय नमः 
 वक्रतुंड महाकाय कोटिसूर्यसमप्रभ । 
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा
"आप सभी को गणेश-चतुर्थी की बहुत बहुत शुभकामनाएं "

मंगलवार, 16 अगस्त 2011

आज के ज़माना के पढ़ई....हो जाथे करलई. आवौ पहाड़ के सुन्दरता ला निहारत जाई

पंद्रही ले जादा होगे  (पंद्रह-20 दिन पहले) बेटा  ला हिमाचल प्रदेश, जउन ला देव भूमि घलो कथें, के मंडी आई आई टी मा छोड़ के आये हन. माई पिल्ला त नई गे रेहेन. दाई दादा अउ बेटा भर गे रेहेन. नोनी(जउन  दन्त चिकित्सा संकाय के तीसरा साल मा पढ़त हे) के परीक्षा रिहिस. नई जाय पाइस बिचारी. पूरा संसार उबलत हे जी गरमी मा. हिम के आँचल ले बरफ पिघले लगे हे. हमन सोचन बने जाड़ परही कहिके. कहाँ के जाड़. उहाँ होटल म पंखा चलाये बर परे. कुछु होय पहाड़ी इलाका के कुदरती खूबसूरती के का कहना...हमू अपन केमरा मा कैद करके दू चार ठन फोटू ले आय हन....निहारौ आपो मन ....






आई आई टी मंडी

आई आई टी मंडी



व्यास नदी 
व्यास नदी 
व्यास नदी 
 बेटा सुरम्य 

व्यास नदी 
 अपन संगवारी मन संग 

 माँ  बेटा  
जय जोहार......

सोमवार, 15 अगस्त 2011

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं


स्वतंत्रता दिवस  
की  
हार्दिक शुभकामनाएं 
स्वतन्त्र भारत का स्वच्छंद नागरिक
देखता है; दिखाता है,  दुनिया को अद्भुत नज़ारे 
लहरावे परचम एवरेस्ट शिखर पर 
लक्ष्य सर्वोपरि हो देश की रक्षा 
उतरे समर में रख पाहन जिगर पर
भय भूख भ्रष्टाचार की व्याधि से कौन उबारे 
   व्याधि मिटाने की घुट्टी लिए संग,
चल पड़े हैं माननीय वैद्य अन्ना हजारे 
उम्र के आठवें दशक को कर दर किनारे 
राष्ट्र के भावी निर्माता(आज की युवा पीढ़ी)
 माँ भारती तुमको पुकारे 
सत्य व ईमान की राह पे चल वतन को अब सँवारे
जय भारत....वन्दे मातरम् .
जय जोहार.