सूर सूर तुलसी शशि, उरगन केशवदास। अब के कवि खद्योत सम जंह तंह करत प्रकास॥ ये दोहा हमर जैसे अड़हा बर लिखे हे। कभू किताब कापी ल पढ़ेन नही। तोपचंद बने के कोशिश करे लगेन । जब बने बने सुग्घर साहित्य ल देखे नई रहिबे पढ़े नई रहिबे त कायच कर लेबे। बने हे बुलाग जगत एमा थोर बहुत देखा सीखी लिखा जाथे, ओहू टेम मिलथे तब . ए दारी सावन मा बने झड़ी लगे हे। सावन के झड़ी का लगे हे एती पेट गड़बड़ा गे, उहां झड़ी लग गे। घेरी बेरी सुभीता खोली के जवई। ले दे के माड़े हे अभी। लईका ल ले के आई आई टी मा सलेक्शन होगे हे उंहा भरती करवाये बर जाना हे। ए मौसम हा डाक्टर मन बर तिहार बरोबर रथे। जहां देख उंहा लाईन लगे हे । कोनो ल सर्दी खांसी कोनो के पेट खराब। इही खातिर कथें खाये पिये बर सावधानी रखो ए सीजन मा। मन मा आईस ये बिचार हा त लिख पारेंव। अब सोचत हौं एखर हेडिंग का दंव। भले मिक्चर बन गे हे लिखई हा, तभो ले हेडिंग जम जहि तईसे लगथे……… जय जोहार्………………
शुक्रवार, 22 जुलाई 2011
सोमवार, 18 जुलाई 2011
क्या जाता हमारे बाप का
जन "काल का" ग्रास बना ले गई
हावड़ा दिल्ली "कालका" मेल
हे ईश्वर ! है तेरा यह कैसा खेल ?
कुसूर मुसाफिर का क्या था
भोंक दिया इन पर खंजर
खड़े हो गए रोंगटे सबके
देख भयावह यह मंजर
(२)
दफ़न ना हो पायी थी लाशें, हुए मुंबई में बम के धमाके कहीं खेद प्रकट, कोई आरोप जड़त, सब अपनी अपनी हांके
छीना सुहाग, बुझ गया चिराग, हट गया साया माँ बाप का
मकसद हमारा "आतंक" है; मरे कोई जिए कोई
क्या जाता हमारे बाप का
(आतंकवादियों को जरा भी अफ़सोस नहीं होता कि मारे जाने वाले उन्ही के सगे सम्बन्धियों में से हो सकते हैं. उन्हें तो केवल पैदा करनी होती है सबके के दिलों में दहशत .....शायद यह "शंकर" का संहारक रूप हो ......आयें करें विनती उनसे:- प्रभु ! "संहारक" रूप त्यागें, जगत का कल्याण करें .
"हर हर महादेव" "बोल बम" "ॐ नमः शिवाय"
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥
जय जोहार .........
"ॐ नम: शिवाय"
"ॐ नम: शिवाय" श्रावण मास के प्रथम सोमवार की आप सभी को बहुत बहुत हार्दिक शुभ कामनायें। प्रभू से विनती है समस्त जगत का कल्याण करें। हममे चेतना जागृत हो सत्कर्म के साथ जीवन यापन की सुख दुख मे प्रत्येक का साथ देने की। "मृत्युंजय महादेव त्राहिमाम शरणागतम" जन्म मृत्यु जरा व्याधि: पीड़ितमकर्मबंधनै:" पुन: आप सभी को श्रावण मास के प्रथम सोमवार की बहुत बहुत शुभकामनायें जय जोहार ………
रविवार, 3 जुलाई 2011
दुम में कितना है दम
दुम में कितना है दम
कुत्ता
जानवरों में वफादार
दुम हिलाता मालिक सम्मुख
पाता है मालिक का प्यार
भार है घर की रखवाली का
होवे दुलारा घरवाली का
सुनके आहट अजनबी की
कहता है, हो जा प्यारे खबरदार!
करना नही देहरी पार
वरना
दुम की तरह, इरादे हैं पक्के
रह न पाओगे मानव तुम
कर दूंगा तुम पे दन्त, नख वार
(३)
इंसान की दुम हो गयी है गायब
फिर भी दुम हिलाता फिरता है
दुम की दम पे टिकता है,
रख ताक इज्जत बिकता है
हो चुकी होती है देर सम्हलने को
जब दुनिया की नजरों से गिरता है
जय जोहार............
डार्विन ने मानव विकास के बारे में कहा था कि पहले मानव की भी पूँछ होती थी लेकिन लंबे समय तक इस्तेमाल न होने की वजह से वह धीरे-धीरे ग़ायब हो गई. वैज्ञानिक मानते हैं कि रीढ़ के आख़िर में पूँछ का अस्तित्व अब भी बचा हुआ है. वे ऐसा कहते हैं तो प्रमाण के साथ ही कहते होंगे क्योंकि विज्ञान बिना प्रमाण के कुछ नहीं मानता. बात जब रीढ़ की हड्डी की हो तो यह सभी जानते हैं कि रीढ़ की हड्डी की मजबूती हमारे शरीर के लिए कितना महत्वपूर्ण है. और जब रीढ़ की हड्डी मजबूत हो तो 'दुम' जिसका अस्तित्व रीढ़ की आखिर में होना माना जा रहा है, में दम तो रहेगा भाई. विवेकशील मानव में दुम का भौतिक रूप में दृश्य अस्तित्व भले न हो चारित्रिक अस्तित्व तो अवश्य है. मन में उमड़ते घुमड़ते विचारों की श्रृंखला की एक कड़ी आपके समक्ष प्रस्तुत है कुछ इस तरह;
(१)
माता सीता की खोज में
रामदूत हनुमान का हुआ आगमन लंका
दुम हिलाया नहीं, दुम दबाया नहीं,
वह दुम ही तो है,
राख कर दी थी सोने की नगरी
दुराचार पर सदाचार की
जीत का बज गया था डंका
दुराचार पर सदाचार की
जीत का बज गया था डंका
(२)
कुत्ता
जानवरों में वफादार
दुम हिलाता मालिक सम्मुख
पाता है मालिक का प्यार
भार है घर की रखवाली का
होवे दुलारा घरवाली का
सुनके आहट अजनबी की
कहता है, हो जा प्यारे खबरदार!
करना नही देहरी पार
वरना
दुम की तरह, इरादे हैं पक्के
रह न पाओगे मानव तुम
कर दूंगा तुम पे दन्त, नख वार
(३)
इंसान की दुम हो गयी है गायब
फिर भी दुम हिलाता फिरता है
दुम की दम पे टिकता है,
रख ताक इज्जत बिकता है
हो चुकी होती है देर सम्हलने को
जब दुनिया की नजरों से गिरता है
जय जोहार............
रविवार, 5 जून 2011
"होनहार बीरबान के होत चीकने पात"
"होनहार बीरबान के होत चीकने पात"
प्रत्येक माँ बाप की दिली तमन्ना होती है की उनकी संतान संस्कारिक कुशाग्र बुद्धि वाला और कुछ कर दिखाने का जज्बा रखने वाला हो. कहते हैं न "पूत कपूत तो का धन संचय. पूत सपूत तो का धन संचय" मेरे अनुसार शायद इसका अर्थ यह होना चाहिए; माँ बाप के लिए संस्कारिक संतान ही सबसे बड़ा धन होता है. कपूत निकला तो संचय किया हुआ धन व्यर्थ चला जाएगा और सपूत निकला तो खुद धन कमा लेगा. बच्चे की उपलब्धि पर जितनी ख़ुशी उपलब्धि हासिल करने वाले को नहीं होती उतनी माँ बाप को होती है. इसका अनुभव दर-असल हमें आज विशेष रूप से हुआ. हमारा बालक "सुरम्य गुप्ता" वैसे तो बचपन से ही पढ़ाई के प्रति समर्पित रहा है, कोशिश यही रहती थी की शत प्रतिशत अंक अर्जित किया जावे. यदि १-२ नंबर कम मिलते थे तो आँखों से आंसू निकलना शुरू. हमें लगा कहीं यह स्वभाव आगे चलकर अवसाद को न निमंत्रण दे दे. धीरे धीरे उसे समझाते गए, नर्वसनेस को अपने जीवन में स्थान नहीं देने के लिए. माध्यमिक शिक्षा ९४% अंक के साथ उत्तीर्ण किया. सी बी एस ई पाठ्यक्रम रहा. गणित उसका प्रिय विषय है. कोचिंग भी लिया और इस वर्ष बारहवीं की परीक्षा ८९% (भौतिक, रसायन व गणित में क्रमशः ९४, ९१, व ९५ प्रतिशत) अंक प्राप्त कर उत्तीर्ण किया. सबसे अहम् बात रही भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आई आई टी -जे ई ई ) प्रवेश परीक्षा, जिसमे केवल ९,५०० - १०००० छात्र चुने जाते हैं, ४,३०५ रेंक के साथ उत्तीर्ण कर लेना. अभी ए आई इ इ इ का परिणाम आना बाकी है. इस परीक्षा में लगभग पांच लाख छात्र भाग लिए थे. इसके अलावा बिट्स पिलानी के लिए भी पात्रता हासिल कर लिया है. आज भारतीय स्टेट बैंक, क्षेत्रीय व्यवसाय शाखा भिलाई द्वारा आई आई टी में चयनित छात्रों के लिए सम्मान समारोह का आयोजन किया गया था. वैसे भिलाई शहर छत्तीसगढ़ प्रांत का "एजुकेशन हब" कहलाता है. हर साल इस शहर से ही औसतन ४०-५० छात्र चयनित होते हैं. करीब पचास चयनित छात्रों ने हिस्सा लिया. प्रोत्साहन राशि स्वरुप प्रत्येक छात्र को १००१ रुपये प्रदान किया गया. हमने भी इस कार्यक्रम में पत्नी श्रीमती सुरेखा गुप्ता (वे स्वयं भारतीय स्टेट बैंक में कार्यरत हैं), बिटिया सुरभि गुप्ता (दन्त चिकित्सा निकाय में तृतीय वर्ष की छात्रा) व बेटा सुरम्य गुप्ता के साथ हिस्सा लिया. यही वह क्षण था, हम सभी के लिए हार्दिक ख़ुशी का. बिटिया भी माध्यमिक व उच्च्तार माध्यमिक परीक्षा अच्छे अंकों के साथ उत्तीर्ण कीं. वैसे मै उसे ऑलराउंडर कहता हूँ क्योंकि वह उतनी ही रूचि के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों में बढ़ चढ़ कर हिसा लेती है. टॉप रेंक वाले तो कोटि कोटि बधाई के पात्र हैं ही, अपने बेटे सहित उन सभी विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई देना चाहूँगा जिन्होंने यह परीक्षा उत्तीर्ण की है. अपने समस्त स्वजनों/ आत्मीयजनो/ मित्रों से उनकी प्रत्यक्ष/प्ररोक्ष दुआओं के लिए भी आभारी रहूँगा साथ ही बच्चे के उज्जवल भविष्य के लिए उनका आशीर्वाद चाहूँगा......
जय जोहार..........
शनिवार, 21 मई 2011
नगर नागपुर में तैनाती, हम हुए ब्लॉग लेखन से दूर
नगर नागपुर में तैनाती, हम हुए ब्लॉग लेखन से दूर
लगने लगा; थी चार दिन की चटक चांदनी
अब होगी अँधेरी हर रात हुजूर
किन्तु
स्नेह- सामीप्य- सुधा- बरसी
२९ अप्रैल दोपहरी को
अविस्मर्णीय बना वह क्षण
सम्मुख पाया मन हर्षाया
छत्तीसगढ़ "सारस्वत" ब्लॉग रत्न
संग संग छत्तीसगढ़ साहित्य के प्रहरी को
देर आये .......दुरुस्त आये तो नहीं कहूँगा बल्कि देर आये खूब सुस्ताये वाली बात चरितार्थ हो रही है. हिंदी साहित्य निकेतन नई दिल्ली की और से सारस्वत सम्मान हेतु चयनित मेरे सभी आदरणीय व प्रिय ब्लॉगर मित्र गणों सर्व श्री संजीव तिवारी जी , ललित शर्मा जी, जी. के. अवधिया जी, गिरीश पंकज जी अल्पना देशपांडे जी, पाबला जी, शरद कोकास जी आदि सभी को मेरी ओर से हार्दिक बी लेटेड बधाई स्वीकार हो.
जय जोहार ............
.
सोमवार, 4 अप्रैल 2011
नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं
या देवी सर्वभूतेषु मात्रि रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः
(१)
साल दो हजार ग्यारह का, अंग्रेजी मास अप्रेल है
कर दिया नाम रोशन देश का वह क्रिकेट का खेल है
दिन न था एक अप्रैल का, बना पाता कोई अप्रैल फूल
ये थे धोनी के धुरंधर, चटा दिए दिग्गज टीमों को धूल
टीम की एकजुटता, खिलाड़ियों का जुनून,
देशवासियों की दुआएं, प्रभु ने लिया था सुन
तारीख थी २ अप्रैल की, दृढ प्रतिज्ञ थे धोनी
राष्ट्र- कीर्ति हेत लक्ष्य "विजय" हो,
कैसे हो सकती थी अनहोनी
(२)
केवल खेल- दीवानगी, देश प्रेम का हो न पर्याय
काज करें रख भाव यह "सर्व जन हिताय, सर्वजन सुखाय
नव संवत्सर प्रारम्भ हुआ, है तिथि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा
माँ भगवती से करें प्रार्थना रहित हो साल आपदा विपदा
मात्रि स्वरूपा, शक्ति स्वरूपा माँ को बारम्बार प्रणाम है
त्राहि त्राहि न मचे जग में, करे बिनती आम अवाम है.
आप सभी को नव-वर्ष नवरात्रि की शुभकामनाओं सहित
जय जोहार ........
सदस्यता लें
संदेश (Atom)


