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रविवार, 10 अगस्त 2014

मौसम, उमस व मच्छर

मौसम, उमस व मच्छर

मौसम पर डाले गये पोस्ट को कब डीलिट मिल गया(एक्चुअली गलती से डीलिट हो गया) समझ नही पाया...सोच रहा हूं वक्त न करूं जाया ...फिर से लिख मारूं भाया:-
मौसम का बदला था तेवर
इक दोपहरी बरसा जमकर
बादल ने दिखलाया ताव
भले बरसा वह घंटा पाव
(मात्र पंद्रह मिनट)

सूरज निकला गरमी लेकर
डूब चला वह ऊमस देकर
 

चंद घंटे बदरा छितराये
चमक चांद चांदनि इतराये
चला न इनका यूं इतराना
पुनि नभ बादल का छा जाना
उमस प्रभाव भये बड़ व्याकुल
तन बैठन मच्छर अति आकुल
मम शरीर खल कीन्ह चढ़ाई
रक्तपान करि तुरतहि जाई
बार बार यहि कृत्य ये करते
कछु भग जात मारे कछु मरते
बार बार करुं सोच बिचारा
कब मिलिहैं इनसे छुटकारा
लगा शयन-पट मच्छरदानी
तव सो पायेंव नींद सुहानी
मच्छरदानि लगाइये करें न म़च्छर तंग
बात हमेशा मानिये नहि होगी निद्रा भंग.
जय जोहार...

3 टिप्‍पणियां:

kuldeep thakur ने कहा…

पावन पर्व रक्षाबंधन की असंख्य शुभकामनाएं...
सुंदर प्रस्तुति...
दिनांक 11/08/2014 की नयी पुरानी हलचल पर आप की रचना भी लिंक की गयी है...
हलचल में आप भी सादर आमंत्रित है...
हलचल में शामिल की गयी सभी रचनाओं पर अपनी प्रतिकृयाएं दें...
सादर...
कुलदीप ठाकुर

Smita Singh ने कहा…

बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति

प्रतिभा सक्सेना ने कहा…

मौसम का मिजाज़ यों ही बदल जाता है -पल में कुछ और पल में कुछ और १