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बुधवार, 12 नवंबर 2014

जाति और धर्म

 जाति और धर्म 
जात धरम के नाम पर, करते अत्याचार.
कोइ किसी के सामने क्यों होते लाचार.
क्यों होते लाचार, टेक घुटने हम देते.
मान वोट आधार  दमन की सुधि नहि लेते.
दे आतंक पनाह मुल्क एक, कहता करने को बात.
कंहि होवे न खतम इंसानियत, रह जाय धरम औ जात..
जय जोहार
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