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शुक्रवार, 5 नवंबर 2010

"दीपावली की हार्दिक शुभ कामनाएं"

"दीपावली की हार्दिक शुभ कामनाएं"
उर उत्साह उमंग के संग 
जीतें जीवन की हर जंग 
काम क्रोध मद लोभ ईर्ष्या 
अरु बैर भाव का तिमिर हटे
दुःख दारिद्र्य मिटे सबका 
संताप, ताप, सब पाप कटे
दीपोत्सव की रोशनी 
घर घर लाये उजियारा
दीप कतार है छटा बिखेरे 
प्रासाद कुटीर हर गलियारा  
सभी मित्रों को पुनः  दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं 
जय जोहार..........

गुरुवार, 4 नवंबर 2010

छोटी दीपावली की बहुत बहुत बधाई

पौराणिक कथाओं के अलावा ऐसा प्रतीत होता है कि स्वास्थ्य की दृष्टि से शरीर में चरम रोग न होने पाए साथ ही रक्त प्रवाह सुचारू रूप से होता रहे इसलिए प्रकृति प्रदत्त द्रव्यों यथा तिल, चिचड़ा आदि का उबटन लगा व मालिश कर स्नान करना वर्णित है जो वैज्ञानिक दृष्टिकोण से उचित प्रतीत होता है.
नरक चतुर्दशी की जिसे छोटी दीपावली भी कहते हैं। इसे छोटी दीपावली इसलिए कहा जाता है क्योंकि दीपावली से एक दिन पहले रात के वक्त उसी प्रकार दीए की रोशनी से रात के तिमिर को प्रकाश पुंज से दूर भगा दिया जाता है जैसे दीपावली की रात। इस रात दीए जलाने की प्रथा के संदर्भ में कई पौराणिक कथाएं और लोकमान्यताएं हैं। एक कथा के अनुसार आज के दिन ही भगवान श्री कृष्ण ने अत्याचारी और दुराचारी दु्र्दान्त असुर नरकासुर का वध किया था और सोलह हजार एक सौ कन्याओं को नरकासुर के बंदी गृह से मुक्त कर उन्हें सम्मान प्रदान किया था। इस उपलक्ष में दीयों की बारत सजायी जाती है।
इस दिन के व्रत और पूजा के संदर्भ में एक अन्य कथा यह है कि रन्ति देव नामक एक पुण्यात्मा और धर्मात्मा राजा थे। उन्होंने अनजाने में भी कोई पाप नहीं किया था लेकिन जब मृत्यु का समय आया तो उनके समझ यमदूत आ खड़े हुए। यमदूत को सामने देख राजा अचंभित हुए और बोले मैंने तो कभी कोई पाप कर्म नहीं किया फिर आप लोग मुझे लेने क्यों आए हो क्योंकि आपके यहां आने का मतलब है कि मुझे नर्क जाना होगा। आप मुझ पर कृपा करें और बताएं कि मेरे किस अपराध के कारण मुझे नरक जाना पड़ रहा है। पुण्यात्मा राज की अनुनय भरी वाणी सुनकर यमदूत ने कहा हे राजन् एक बार आपके द्वार से एक ब्राह्मण भूखा लौट गया यह उसी पापकर्म का फल है।

दूतों की इस प्रकार कहने पर राजा ने यमदूतों से कहा कि मैं आपसे विनती करता हूं कि मुझे वर्ष का और समय दे दे। यमदूतों ने राजा को एक वर्ष की मोहलत दे दी। राजा अपनी परेशानी लेकर ऋषियों के पास पहुंचा और उन्हें सब वृतान्त कहकर उनसे पूछा कि कृपया इस पाप से मुक्ति का क्या उपाय है। ऋषि बोले हे राजन् आप कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का व्रत करें और ब्रह्मणों को भोजन करवा कर उनसे उनके प्रति हुए अपने अपराधों के लिए क्षमा याचना करें।
राजा ने वैसा ही किया जैसा ऋषियों ने उन्हें बताया। इस प्रकार राजा पाप मुक्त हुए और उन्हें विष्णु लोक में स्थान प्राप्त हुआ। उस दिन से पाप और नर्क से मुक्ति हेतु भूलोक में कार्तिक चतुर्दशी के दिन का व्रत प्रचलित है। इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर तेल लगाकर और पानी में चिरचिरी के पत्ते डालकर उससे स्नान करने का बड़ा महात्मय है। स्नान के पश्चात विष्णु मंदिर और कृष्ण मंदिर में भगवान का दर्शन करना अत्यंत पुण्यदायक कहा गया है। इससे पाप कटता है और रूप सौन्दर्य की प्राप्ति होती है।
कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को उपरोक्त कारणों से नरक चतुर्दशी, रूप चतुर्दशी और छोटी दीपावली के नाम से जाना जाता है.
मेरे सभी ब्लॉगर मित्रों को पांच दिवसीय दीपोत्सव पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं. 
स्वर्ग यहीं है नर्क यहीं है यदि अनुभव यह कर पाए 
सन्मार्ग पर रखें कदम,  पग में  कांटे न चुभने पाए
दुःख सुख में बन सबके सहभागी सहृदयता का अलख जगाएं
"प्रकाश" के इस पावन पर्व में अवगुण का अँधेरा मिटायें 
हम ऐसी दिवाली मनाएं 
जय जोहार .........

बुधवार, 3 नवंबर 2010

जीवन के चढ़ते उतरते ग्राफ

जीवन के चढ़ते उतरते ग्राफ 
जीवन में लक्ष्य निर्धारण और उस लक्ष्य को पाने के लिए किया गया प्रयास मायने रखता है वरना रोजमर्रे की जिंदगी तो सब जी रहे हैं.  चाहे विद्वजन हों, विद्यार्थी हों, साधारण मनुष्य हो सभी चाहते हैं जानना; जो भी कार्य वे कर रहे हैं वह किस स्तर का है ? मसलन विद्योपार्जन में निर्धारित पैमाना होता है लिखित व मौखिक परीक्षा जिसका आंकलन पूछे जाने वाले सवालों के लिए निर्धारित अंक में से कितना प्राप्त करने योग्य है यह विचार  कर किया जाता है .  अंक गणित का महत्त्व जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में है.  तुलनात्मक अध्ययन के लिए तो शत-प्रतिशत. जीवन में आने वाले उतार चढ़ाव के लिए भी.  अब यहीं देख लीजिये; आपका सक्रियता क्रमांक कैसे नंबर वन को छू ले इसी उधेड़बुन में लगे रहते हैं. अच्छी बात है कम से कम स्तरीय लेख-प्रलेख-आलेख (लिख तो दिया किन्तु यदि इनके अलग अलग मायने पूछें जाँय तो नही मालूम, कृपया संक्षिप्त में जानकारी जरूर दीजियेगा), सहित मन में  उपजते तरह तरह के सुविचारों के प्रस्तुतिकरण में निरंतरता बनी रहती है जो पठन पाठन के लिए बहुत उपयोगी है. इन आंकड़ों के अनुसार बनते ग्राफ और मन में उमड़ती प्रतिक्रियाएं कुछ इस तरह बयाँ की जा सकती है

बारहवीं की परीक्षा का
निकल चुका है नतीजा
"प्रथम" आया है अपनी कक्षा में 
अपने प्यारे चाचा का भतीजा 
बंट रही है मिठाई घर में 
अवसर है, खुशियाँ  बांटने का 
अगले पाय दान में अच्छी फेकल्टी 
के साथ कॉलेज छांटने का 
(२)

मिल गया मनचाहा विषय, मनचाहा कॉलेज
बस देते हैं यही समझाइश 
जी भर के मेहनत करो बढ़ाओ अपना नॉलेज
(३)
नए कॉलेज में प्रवेश किये. बीता था एक महीना
 कॉलेज की रेगिंग परिपाटी ने सारा सुख -चैन छीना
"अवसाद" के लक्षण दिखने लगे थे चेहरे पर साफ़ साफ़
चंद दिनों में उतर गया था खुशियों का यह ग्राफ.

यह तो महज एक महाविद्यालय का दृश्य था. ऐसे कई अवसर आते हैं जो पल में खुशी दे जाते हैं  व पल में दुखों का पहाड़ खडा कर देते हैं. यही जीवन चक्र है. दुःख से सामना ना हुआ हो तो सुख की अनुभूति कैसे हो सकती है. 
                आज है धनतेरस : सभी मित्रों को हार्दिक शुभकामनाएं. माँ लक्ष्मी की कृपा से सबके घरों में धन बरसे, सुख समृद्धि वैभव से भर दे. 
जय जोहार...........

मंगलवार, 19 अक्टूबर 2010

"गरीबी" रह जाती है बनके हमेशा नेताओं की "मसखरी"

"गरीबी" रह जाती है बनके हमेशा नेताओं की "मसखरी" 
(१)
आज की विकराल समस्या
मँहगाई, बेरोजगारी भूखमरी
इनके तले दबी "गरीबी" 
रह जाती है बनके हमेशा नेताओं की "मसखरी" 
(२)
कुदरत ने भेजा है हमें
बाकायदा दिलो दिमाग़ के साथ
कुछ कर गुजरने की हो तमन्ना
 बैठ न  सकेगा फ़ालतू, धरके अपने हाथ पे हाथ
 (३)
 न कर पाया हासिल तालीम ऊंची
फिक्र की कोई बात नहीं
  उगता है सूरज, खिलती है चांदनी,
लावे अमावस का अँधेरा,  जीवन में हर रात नहीं
(४)
पांचवी पास एक आदमी, हुनर है ' काष्ठ-कारी'  का 
दे रहा रोजगार औरों को, काम है ठेकेदारी का
जरूरत है जज्बे की दिल में,  हो जायेंगी सब समस्या दूर  
मन के उमड़ते घुमड़ते इन विचारों पे गौर फरमाइयेगा जरूर.  
जय जोहार.............

रविवार, 17 अक्टूबर 2010

"काम क्रोध मद लोभ सब, नाथ नरक के पंथ 
सब परिहरि रघुबीरही भजहु भजहि जेहि संत"
विजया दशमी की हार्दिक शुभकामनाएं 

शनिवार, 16 अक्टूबर 2010

होती है "हार" हर हाल में पिशाच विषयासक्ति की

"नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गा: प्रकीर्तिताः"
 "माँ सिद्धिदात्री" आप सबके कारज सिद्ध करें. बहुत बहुत शुभकामनाओं सहित......
करते हैं उपासना "शक्ति" की, 
होती है परीक्षा "भक्ति" की
नवरात्रि रख नित स्वच्छ मन, 
श्रद्धा सहित साधक तू बन 
माँ के चरणों में कर खुद को  अर्पण, 
होगी माँ की कृपा तुझ पर 
परख अपना सामर्थ्य तू, 
होती है हार हर हाल में 
पिशाच विषयासक्ति की.....
"जय माँ दुर्गे"
पुनः नवमी एवं आने वाले पर्व "विजयादशमी" के पावन अवसर पर मेरे समस्त ब्लॉगर मित्रों को बहुत बहुत बधाई व अनेकों शुभकामनाएं
जय जोहार............

शुक्रवार, 15 अक्टूबर 2010

अब हो सकेगा आप लोगों से नित मेल मिलाप जरूर

समस्त ब्लॉग मित्रों को नमस्कार एवं नवरात्रि की बहुत बहुत शुभकामनाएं. माँ भगवती आप सभी की मनोकामना पूर्ण करे.
बदले अपना निवास, ब्लॉग से हो गए थे दूर 
क्या करें, अंतरजाल कट चुका था 
भारत संचार निगम लिमिटेड 
की असीम कृपा हुई, 
दूरभाष स्थानान्तरण आवेदन दाखिल करने के 
दो माह बाद लग पाया कनेक्शन,  हुजूर.
आशा ही नहीं विश्वास है, अब हो सकेगा आप लोगों से 
नित मेल मिलाप जरूर ........
जय जोहार.....................