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शुक्रवार, 1 नवंबर 2013

धन्वन्तरी जयंती/धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएं

धन्वन्तरी जयंती/धनतेरस  की हार्दिक शुभकामनाएं 
 कार्तिक कृष्णा त्रयोदशी, धनतेरस कहलाय
प्राकट्य दिवस धन्वन्तरी, यह दिन माना जाय 

धन-देव कुबेर संग संग काल देव यमराज 
रखवाले काया माया के पूजे जाते आज 

नव स्वर्ण रजत आभूषण अरु नव पीतल पात्र 
क्रय शुभ इनके होत हैं तिथि धन तेरस मात्र 

संध्या तेरह दीप जौं दिस दक्षिणहि दिखाय 
अकाल काल नहि प्रान हरे यम किरपा बरसाय

सूर्यकांत करे कामना कभु रहे न विपदा संग 
धनतेरस परब मनाइए धरि उर उत्साह उमंग 

धन्वन्तरी जयंती की हार्दिक शुभकामनाओं सहित 
                                                                                                                                     जय जोहार

सोमवार, 21 अक्टूबर 2013

देश की ब्यूटी


 देश की  ब्यूटी

तन मन धन बल सब चले, तब जाके पाते सत्ता
बहु-प्रकार के छद्म से, दे जाते सबको को धत्ता

निर्वाचन ड्यूटी सख्त, सेवक सरकारी के लिए
चढ़ते सस्पेंसन की तख़्त, हो जाय चूक तनिक भी

फिर भी कहते हैं;

निर्वाचन प्रक्रिया देश की है  ब्यूटी
जुड़ जा तन मन धन से प्यारे कर तू अपनी ड्यूटी ....
जय जोहार ...

शनिवार, 19 अक्टूबर 2013

दुहाई प्रजातंत्र की

मतदाता और उम्मेदवार दोनों, चुनाव आयोग का निष्पक्ष एवं स्वच्छ चुनाव कराने का संकल्प पूरा करने में अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करें, इस प्रजातांत्रिक देश की चुनाव प्रक्रिया की दुहाई अनेकों देश दे रहे हैं ....गौर फरमाइयेगा:
देत दुहाई प्रजातंत्र
की कहें भारत देश महान
फिकर प्रजा की किसको कितनी गये हैं जन जन जान
आया त्योहारों का मौसम, दशहरा दीवाली
समर चुनाव में कूद रहे हैं बड़े बड़े बलशाली
निर्णायक जी सख्त हैं, खातिर निश्पक्ष चुनाव
भय दबाव प्रलोभन जैसे नहीं चलेंगे दांव
हिस्से चुनाव तंत्र के कर्मचारी अधिकारी
विधि विधान से निभा रहे सब अपनी जिम्मेदारी
मुखिया ऐसा छांटिए, हो जिनमे सद्भाव
जनता का दुःख हर सके, करे न गहरा घाव
                                      

जय जोहार.........

रविवार, 6 अक्टूबर 2013

नव-रात्रि की हार्दिक शुभकामनायें

 मां दुर्गा आज पधारि हैं, ग्राम गली हर द्वार। 
 नित वरद हस्त हो हम पर उनका, पायें उनका प्यार॥ 
पूत कपूत हो जात है होय न मात कुमात। 
कर सच्चे मन से मां की सेवा, कष्ट से पायें निजात॥
मां भगवती आपकी मनोकामना पूरी करे……
Photo: मां दुर्गा आज पधारि हैं, ग्राम गली हर द्वार।                                                           नित वरद हस्त हो हम पर उनका, पायें उनका प्यार॥                                                 पूत कपूत हो जात है होय न मात कुमात।                                                             कर सच्चे मन से मां की सेवा, कष्ट से पायें निजात॥                                            
 मां भगवती आपकी मनोकामना पूरी करे…… 
 जय जोहार……

बुधवार, 2 अक्टूबर 2013

बापू बपरा देखत होही देस के खस्ता हाल

बापू बपुरा देखत होही, देस के खस्ता हाल। 
नानकुन नोनी ले दई बहिनी के होगे हे हाल बेहाल॥ 
मार काट दिन रात बढ़त हे, बाढ़त हे चोरी हारी। 
देस के करता धरता करथें, छीना झपटी मारा मारी।
साधू संत के भेस म लुटथें बहिनी बेटी के अस्मत। 
अरबों के असामी बन जाथें वाह रे इन्खर किस्मत। 
मिलिस अजादी, पर भुला डरेन हम नियम संयम अनुशासन। 
रिश्ता नाता के गला घोंट के बन जाथन दु:शासन। 
अरे दाल म काला केहे ल छोड़ के केहे ल परत हे करिया दाल। 
बापू बपरा देखत होही देस के खस्ता हाल। 
गांधी जयंती के उपलक्ष म आप जम्मो ल बहुत बहुत बधई…।

गुरुवार, 1 अगस्त 2013

विचार उमड़े घुमड़े जरूर पर बरसे नहीं

                वाकई हम फेसबुक व ब्लॉग दोनों से दूर चल दिए थे । चाहे वह छत्तीसगढ़ की झीरम घाटी की नक्सलियों द्वारा किये गए भीषण नरसंहार की खौफ़नाक घटना हो या शिवधाम "केदारनाथ" का तांडव। मन में विचार उमड़ते घुमड़ते जरूर थे पर हम जड़वत रह  अपने कर-अंगुष्ठ व अंगुलिकाओं को कंप्यूटर के कुंजीपटल पर चलने  नहीं  दिए । नतीजा;  विचार उमड़े घुमड़े जरूर  पर बरसे नहीं।  बड़ी मुश्किल से आज मन कह रहा है प्रायश्चित स्वरूप ही सही,  कुछ तो लिख।
फेस बुक अरु ब्लॉग से,  हो गए थे तनि दूर। 
  घटना नर संहार की , बरनि न जाइ हुजूर।।
पहली घटना अपने प्रांत छत्तीसगढ़ की "झीरम घाटी में "नक्सलियों का ताण्डव", और दूसरी घटना देवभूमि उत्तराखंड में प्रकृति प्रकोप या कहें भगवान् भोलेनाथ का कुपित होना …. हजारों की  संख्या में जनता का अकाल काल के गाल में समां जाना । विनाश लीला नहीं तो और क्या … केदारनाथ धाम के प्रलयंकारी बाढ़ की विभीषिका का सामना कर बचे लोगों का अपनों को खो देने के दुःख में विव्हल हो विलाप करना …. निरंतर टी वी चेनलों में दिखाया जाना मन को झकझोर देता था। आंखों में आंसू डबडबा  जाते थे । घटना के पहले सब कुछ सामान्य । पर बाद में !!!!!  एक दूसरे पर कीचड़  उछालना शुरू ("किनका किनके ऊपर" बताने की आवश्यकता प्रतीत नहीं हुई )।  इसी परिपेक्ष्य में काफी दिनों पहले इस नाचीज द्वारा अपने उमड़ते विचारों की श्रंखला के अंतर्गत "तवा गरम है सेंक लो रोटी" शीर्षक वाली रचना  ब्लॉग मंच पर रखी  गयी थी। ऐसी  ह्रदय विदारक घटनाओं में आहूत हुई आत्माओं को शत शत नमन व अश्रुपूरित श्रद्धांजलि के साथ झीरम घाटी की घटना के दौरान उपजे मन के विचार:-  
"नक्सलियों का ताण्डव"
नकेल नाक नक्सली के कोउ कस नहि पावै 
सवा सवा हाथ हर दिन बढ़ जात है 
खादी खाकी वर्दीधारी देख नथुना फुलावे 
छिप छिप के करत जात प्रान घात है 
"अपनों"  का खोना परिवार कैसे सहि पावै 
गहराई सदमे की नापे न नपात है 
बार बार याद करि सिसक सिसक रोवै 
आंसुओं की धार रोके रुकत न जात है 
कोउ के नयन-नीर लगे घड़ियाली  आंसू
कहत कहत "कृत्य निन्द्य"  न अघात है 
नक्सली समस्या से निजात कैसे देश पावे 
कोउ  काहे कोई समाधान न सुझात है  
                                                                             ……              
                                      जय जोहार……

मंगलवार, 26 मार्च 2013

होली की हार्दिक शुभकामनाएं

होली की हार्दिक शुभकामनाएं 
जय जोहार……।