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बुधवार, 13 जनवरी 2010

ब्लॉग लेखन ला चालीसा लग गे

ये गाड़ी हा धीमी गति के लोकल आय
 रेंग डरे हे बड़े ब्लोगरीयन के गाड़ी बड़ दुरिहा  
नई  सकस  तैं  एखर  दूरी  नपाय 
तोर  गाड़ी  त  ट्रायल  मा  हे  अभी
अढाई  कोस तक  हे पहुंचे  पाय (चालीस पोस्ट होए हे )
मन हा कहत हे चलै  भले   धीरे   
कछुआ सही  आगू  बढ़ते  जाय
स्पीड  ब्रेकर  अब्बड  अकन  परही
तोर  जी  ओकर  ले  झन  घबराय
टिपियावन पाए के लालसा  मत राखबे
सुग्घर  मेटर  लिखावत  जाय; अउ
घर ऑफिस के बूता निप्टाबे
इही मा झन रहिबे बिप्तियाय
(ये सब अपन मन ल कहत हौं)
जय जोहार...........

1 टिप्पणी:

ललित शर्मा ने कहा…

हा हा हा!जोरदार गोठ लिखे हस गा। बने मजा आगे। बस लोकल मा एक्सप्रेस के ईजिन लगाना हे। फ़ेर जान दे गर गर गाड़ी ला, 40 लगे के बधई, बने संकरायत मनाव अऊ तिली गुड़ के लाड़ु खाव और जम्मो दोस्त मितान मन ला खवाव ईही कामना हे।