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शनिवार, 16 जनवरी 2010

बहुत बढ़िया बात, छहिंगलिश के शब्द कोष तैयार

कभू कभू बिहनिया ले फुरसतिया ले  अखबार पढ़बे के टाइम मिलथे. जहाँ फुर्सत उहाँ मन भर के पढ़ ले जी. तौ सबले पहिली हमर परदेस के भाखा के शब्द कोष तैयार होए के बारे म  पता चलिस बड़ सुग्घर लागिस. दैनिक भास्कर के येदे खबर आय:
दुर्ग. एससीईआरटी ने छत्तीसगढ़ी भाषा  को लिखित रूप से प्रचलित करने के लिए एक अनूठी पहल की है। छत्तीसगढ़ी को राज्य के लोगों तक आम करने के लिए हर विशेष छत्तीसगढ़ी शब्द को संजोकर उसके अर्थ को अंग्रेजी व हिन्दी में बताने के लिए इस शब्दकोष को तैयार किया है।

एससीईआरटी रायपुर के संचालक नंदकुमार का कहना है कि छत्तीसगढ़ आदिवासी बहुल राज्य है। यहां की आधी से ज्यादा आबादी गांव में रहती है। ऐसे में अंग्रेजी को सभी तक पहुंचाना कठिन कार्य है। यह काम और कठिन तब हो जाता है जब ग्रामीण इलाकों में पढ़ने वाले बच्चों की मातृभाष हिन्दी ना हो। ग्रामीण इलाकों के लोग ज्यादातर स्थानीय बोलियों का प्रयोग करते हैं। ऐसे में बच्चों को अंग्रेजी सिखाने के लिए पहले हिन्दी का प्रयोग करना पड़ता था उसके बाद अंग्रेजी में आते थे। बहुभाष शब्दकोष (छत्तीसगढ़ी-अंग्रेजी-हिंदी) इस दिशा में एक अहम कदम है।
इस बारे में राजीव गांधी शिक्षा मिशन दुर्ग के खंड श्रोत कें द्र समन्वयअधिकारी मिथलेश सिंह ने बताया कि यह एससीईआरटी का पहला ऐसा प्रयास है। इस गाइड को भिलाई दुर्ग के 678 मिडिल स्कूलों को तीन-तीन शब्दकोष दिए गए हैं।
इसे पढ़कर सबसे पहले टीचर इसका लाभ लेंगे व उसके बाद इसके अध्ययन से बच्चों को सीधे छत्तीसगढ़ी से अंग्रेजी में अनुवाद करा सकेंगे। खंड अकादमिक समन्वयक अधिकारी शरद शर्मा का कहना है कि इस शब्दकोष केद्वारा बच्चे छत्तीसगढ़ी शब्द के अर्थ को सीधे अंग्रेजी में जान सकेंगे और उसका प्रयोग कर सकेंगे। इस शब्दकोष में तीसरी भाष के रूप में हिंदी को भी रखा गया है जो शब्दों को समझने में आने वाली दुविधाओं से बचाएगा। साथ ही वाक्यों केप्रयोग से बच्चे अंग्रेजी शब्दों के सार्थक प्रयोग को समझ सकेंगे।

5 टिप्‍पणियां:

ललित शर्मा ने कहा…

छहिंगलिश के बढिया जानकारी।
एक भाखा महु फ़ांदा मा परगे
ये काय लिखत हे बईहा नई होगे
हे। बारम्बार धन्यवाद हे सूरुजकांत भैया,
तैं नई आबे कहिके मिटिंग केंसिल
होगे हे, तोरे आए से कोरम पुरा होही।

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari ने कहा…

ये शब्दकोष(छत्तीसगढ़ी-अंग्रेजी-हिंदी) ला बड मेहनत ले नन्द्कुमार साहेब औ उखर अधिकारी मन तियार करवाये हे. जब ये ह हमर हाथ म आही तभे पता चलही भैया. वइसे इखर टीम के मोर गुरुजी नायक सर अउ डा.परदेशी राम वर्मा जी से जानकारी मिले रहीसे.

सूर्यकान्त गुप्ता ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
सूर्यकान्त गुप्ता ने कहा…

अभीच्चे मैं हा राजकुमार जी के सन्देश पढ़े हौं. अरे भाई मोर खातिर काबर केंसिल करे
होहु जी. नई रहितेंव का फरक परतिस दू मिनट के मौन धारण कर लेतेव. हा हा हा हा

Raviratlami ने कहा…

बने खबर बताएस गा. ए किताब हर कहां मिलथे बताहू त हमू मन खरीदबो.