बेंचँय बेचावय बेचात हवै मरे जियो, जघा जघा दारू देख लव खुले आम जी । बंद होय कारोबार मंद के कहत माई, करत विरोध दिन रात सुबह शाम जी।। बेचे बर सरकार खुदे हवै तइयार, एमा अब कइसे कब कसही लगाम जी। पीहीं अउ पियाहीं घलो होली के तिहार मा गा, परय चुकाय बर चाहे कतको दाम जी।।
विदाई(1) प्रभुजी की माया, पाते काया, मानुस के हम, रूप धरे। कर वक्त न जाया, अवसर पाया, परहित के कुछ, काज सरे।। जब क्षण वह आता, प्रान गँवाता, देत विदाई, रोय सभी। मरता दुष्कर्मी, दुष्ट अधर्मी, दुख सचमुच ना होय कभी।। विदाई (2) हे जगत विधाता, हे जग त्राता, रिश्ता नाता, तँही गढ़े। सुख दुख सिखलाये, प्यार जगाये, सँग मा गुस्सा घलो मढ़े।। घर घर के किस्सा, सबके हिस्सा, सुख दुख दूनो संग चलै। ये घड़ी विदाई, बड़ दुखदाई, पीर जुदाई खूब खलै।।
दउड़ावन बइला ला यार।। बइला चुलहा चकला जान। बरतन भाँड़ा सबो मितान।। माटी के बरतन सब लान। नोनी बाबू खेलन जान।। हर तिहार के महिमा ताय। खेल खेल मा देत बताय।। जीये बर सब लागै चीज। खेलत खेलत सीख तमीज।। आज ठेठरी डटके खाव। पोरा सुग्घर परब मनाव।। जय जोहार……
दौलत चाह दौलत की हमें भरपूर है राह कैसी भी रहे मंज़ूर है ग़म नहीं हक दूसरों का छिन रहा आज तो इंसानियत मज़बूर है जय जोहार…… सूर्यकांत गुप्ता.. सिंधिया नगर दुर्ग(छ्त्तीसगढ़)
तीजा तिहार... पगे प्रेम रस चासनी, नाता रिश्ता मान ले। हम तिहार सब मानथन, एकर खातिर जान ले।। उमा उमापति प्रेम तो, उदाहरन संसार के। हे तिहार तीजा सुनौ, पति पत्नी के प्यार के।। बहिनी भउजी दाइ मन, रथें अगोरत तीज ला। राखे रथें सँजोय के, मया पिरित के चीज ला।। मइके के अड़बड़ मया, ले बर जाथे भाइ हा। ठेठरी खुरमी राँधथे, लुगरा राखै दाइ हा।। बिन अहार पानी बिना, करथें कठिन उपास जी। जगैं रात पूजा रखैं, शिव गौरी के खास जी।। किरपा भोलेनाथ अउ, पारबती करहीं सदा। सुखी रहै परिवार सब, बने रहैं दाई ददा।।
जय जोहार.... जम्मो तिजहारिन मन ला तीजा के गाड़ा गाड़ा बधाई ..।.. सूर्यकांत गुप्ता सिंधिया नगर दुर्ग (छ.ग.) (चित्र गूगल से साभार)